खड़गवां (एमसीबी)। छत्तीसगढ़ को देश का “धान का कटोरा” कहा जाता है। मानसून की बारिश के बाद मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले के खड़गवां ब्लॉक में धान की रोपाई का कार्य तेज़ी से शुरू हो गया है। खेतों में पानी भरने के साथ किसान पूरे उत्साह से खेती के कार्य में जुट गए हैं। गांवों में सुबह से शाम तक खेतों में चहल-पहल देखने को मिल रही है।

कुछ सप्ताह पहले तक बारिश का इंतजार कर रहे किसानों को अब राहत मिली है। खेतों में धान की पौध रोपी जा रही है, कहीं ट्रैक्टर से खेत तैयार किए जा रहे हैं तो कहीं पारंपरिक तरीकों से रोपाई का कार्य जारी है। किसानों को उम्मीद है कि मौसम अनुकूल रहा तो इस वर्ष अच्छी पैदावार होगी।
हालांकि खेती के साथ किसानों की चिंताएं भी कम नहीं हुई हैं। धीरे-धीरे खेती महंगी होती जा रही है। डीजल, मजदूरी, बीज, खाद, कीटनाशक और कृषि उपकरणों की बढ़ती कीमतों ने खेती की लागत लगातार बढ़ा दी है। किसानों का कहना है कि लागत बढ़ने के बावजूद फसल का उचित मूल्य नहीं मिलने से आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।
कई किसानों ने यह भी बताया कि समय पर उर्वरक उपलब्ध होना सबसे बड़ी आवश्यकता है। यदि खाद और अन्य कृषि सामग्री पर्याप्त मात्रा में समय पर मिल जाए, तो उत्पादन बेहतर होने की पूरी संभावना है।
इन दिनों गांवों की रौनक खेतों में दिखाई दे रही है। परिवार के अधिकांश सदस्य खेती के कार्य में जुटे हुए हैं। किसान पूरे मनोयोग से धान की रोपाई कर रहे हैं ताकि समय पर फसल तैयार हो सके।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में वर्षा सामान्य बनी रही और किसानों को समय पर आवश्यक संसाधन उपलब्ध हुए, तो एमसीबी जिले में इस बार धान की अच्छी पैदावार होने की उम्मीद है।
किसानों का कहना है कि खेती केवल रोज़गार का साधन नहीं, बल्कि उनके जीवन और गांव की अर्थव्यवस्था की आधारशिला है। उनकी मांग है कि कृषि लागत कम करने, उर्वरकों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने और किसानों को उचित समर्थन मूल्य का लाभ दिलाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि धान के कटोरे छत्तीसगढ़ की पहचान और अधिक मजबूत हो सके।










