📖 CHIRIMIRI SPECIAL — भाग 08
पुरानी सुरंगों से आधुनिक मशीनों तक पहुंचा चिरमिरी का खनन, अब तकनीक के सहारे आगे बढ़ रहा कोयला उद्योग
चिरमिरी | विशेष रिपोर्ट | छत्तीसगढ़ हेडलाइन 1928 के आसपास शुरू हुआ चिरमिरी का कोयला खनन आज करीब 98 साल बाद भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। फर्क इतना है कि जिस खनन के लिए कभी मजदूरों की मेहनत सबसे बड़ी ताकत थी, आज उसी काम में आधुनिक मशीनों और नई तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
चिरमिरी खत्म नहीं हुआ, बल्कि बदल रहा है।
⛏️ Underground से आधुनिक मशीनों तक
चिरमिरी की पहचान लंबे समय से Underground Mining से रही है। जमीन के नीचे सुरंग बनाकर कोयले की परतों तक पहुंचने वाली इस पद्धति में समय के साथ आधुनिक मशीनों को शामिल किया गया।
इनमें Continuous Miner सबसे महत्वपूर्ण तकनीकों में से एक है। यह मशीन भूमिगत खदान में कोयले को काटने और उत्पादन प्रक्रिया को अधिक मशीनीकृत बनाने में मदद करती है।
SECL के 2024-25 के रिकॉर्ड में चिरमिरी क्षेत्र की Rani Atari और Vijay West सहित कुछ भूमिगत खदानों में Continuous Miner तकनीक के उपयोग का उल्लेख है।
🤖 नई तकनीक का नया दौर
चिरमिरी की NCPH भूमिगत खदान में भी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया गया है। 2025 में यहां Low-Height Continuous Miner मशीन की शुरुआत की गई। यह कम ऊंचाई वाली कोयला परतों में खनन के लिए उपयोगी तकनीक है।
इसका उद्देश्य कम ऊंचाई वाली सीम में भी मशीनों के जरिए उत्पादन को अधिक प्रभावी बनाना है। यानी पुरानी भूमिगत खदानों में भी तकनीक के जरिए उत्पादन क्षमता बढ़ाने की कोशिश जारी है।
🚜 चिरमिरी में Opencast Mining भी
चिरमिरी की खनन कहानी सिर्फ भूमिगत खदानों तक सीमित नहीं है। Opencast Mining भी यहां की खनन व्यवस्था का हिस्सा है।
इस पद्धति में जमीन की ऊपरी परत हटाकर अपेक्षाकृत खुले क्षेत्र से कोयला निकाला जाता है। इसमें बड़े Excavator, Dumper, Drilling Machine और दूसरी भारी मशीनों का इस्तेमाल होता है।
SECL के 2024-25 रिकॉर्ड में चिरमिरी क्षेत्र में 4 Underground और 1 Opencast Mine दर्ज थीं।
⚙️ मजदूर से मशीन तक बदली खनन की तस्वीर
पुराने दौर में चिरमिरी की खदानों की पहचान मजदूरों की मेहनत से थी। आज मशीनों ने काम करने का तरीका बदल दिया है।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इंसानों की भूमिका खत्म हो गई। आज भी मशीन ऑपरेटर, इंजीनियर, तकनीकी कर्मचारी, सुरक्षा कर्मी और प्रशिक्षित कामगार खनन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
पहले श्रम प्रधान खनन था, अब तकनीक और कौशल आधारित खनन का दौर है।
📊 उत्पादन जारी, कहानी भी जारी
SECL के उपलब्ध 2024-25 आंकड़ों के अनुसार चिरमिरी क्षेत्र में 3.144 मिलियन टन कोयला उत्पादन दर्ज किया गया, जबकि 2023-24 में उत्पादन 2.496 मिलियन टन था।
यानी उत्पादन में करीब 26 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई।
यह आंकड़ा बताता है कि पुरानी खदानों के बंद होने के बावजूद चिरमिरी का खनन अध्याय पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
🖤 चिरमिरी की असली तस्वीर क्या है?
एक तरफ पुरानी खदानें इतिहास बन रही हैं।
दूसरी तरफ नई तकनीक के साथ कुछ खदानों में उत्पादन जारी है।
एक तरफ पारंपरिक रोजगार का दौर कमजोर हुआ है।
दूसरी तरफ मशीनों और तकनीकी कौशल की जरूरत बढ़ रही है।
इसलिए चिरमिरी को सिर्फ “बंद होती खदानों का शहर” कहना सही तस्वीर नहीं होगी।
सच्चाई यह है कि— चिरमिरी का कोयला उद्योग खत्म नहीं हुआ, उसका स्वरूप बदल गया है।
1928 में मजदूरों से शुरू हुआ यह सफर आज मशीन, तकनीक और आधुनिक खनन के दौर में पहुंच चुका है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस बदलती तकनीक के साथ चिरमिरी के युवाओं के लिए रोजगार के कितने नए रास्ते खुलेंगे?
📖 CHIRIMIRI SPECIAL — भाग 08
“खदान बंद हुई तो सिर्फ कोयला नहीं रुका—चिरमिरी के बाजार और बस्तियों पर क्या पड़ा असर?”
अगली कड़ी में जानिए—
एक खदान बंद होने का असर मजदूर से लेकर दुकानदार, बाजार, परिवहन और पूरी बस्ती तक कैसे पहुंचता है।
पढ़ते रहिए — CHIRIMIRI SPECIAL
छत्तीसगढ़ हेडलाइन | चिरमिरी की 98 साल की कहानी









