नई दिल्ली। डेंगू जैसी गंभीर मच्छरजनित बीमारी से बचाव के लिए भारत को पहली बार एक वैक्सीन मिल गई है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने जापान की दवा कंपनी टाकेडा द्वारा विकसित क्यूडेंगा (QDENGA/TAK-003) वैक्सीन के उपयोग को मंजूरी दे दी है। इसे देश में डेंगू की रोकथाम के लिए स्वीकृत पहली वैक्सीन माना जा रहा है।
यह वैक्सीन डेंगू वायरस के सभी चार प्रमुख प्रकारों (DENV-1, DENV-2, DENV-3 और DENV-4) से सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से विकसित की गई है। इसे 4 से 60 वर्ष आयु वर्ग के लोगों के लिए मंजूरी मिली है। खास बात यह है कि इस वैक्सीन को लगवाने के लिए पहले डेंगू होना जरूरी नहीं है। वैक्सीन की दो खुराक दी जाएंगी, जिनके बीच लगभग तीन महीने का अंतर रखा जाएगा।
क्लीनिकल परीक्षणों के दौरान इस वैक्सीन ने डेंगू संक्रमण के मामलों को कम करने और गंभीर मरीजों के अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम को भी काफी हद तक घटाने के सकारात्मक परिणाम दिए हैं। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि वैक्सीन के साथ-साथ मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाना भी उतना ही आवश्यक रहेगा।
भारत में हर वर्ष बारिश के मौसम में डेंगू के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी होती है। ऐसे में इस वैक्सीन की मंजूरी को सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार, शुरुआती चरण में यह वैक्सीन 2027 की पहली छमाही से निजी स्वास्थ्य संस्थानों के माध्यम से उपलब्ध हो सकती है।
बचाव ही सबसे प्रभावी उपाय
विशेषज्ञों का कहना है कि वैक्सीन के बावजूद लोगों को घर और आसपास पानी जमा नहीं होने देना चाहिए, मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करना चाहिए, पूरी बाजू के कपड़े पहनने चाहिए और मच्छरदानी या रिपेलेंट का उपयोग करना चाहिए। डेंगू पर प्रभावी नियंत्रण के लिए टीकाकरण के साथ-साथ जनजागरूकता और स्वच्छता भी बेहद जरूरी है।










