राखी से आत्मनिर्भरता की डोर: MCB में हुनर को रोजगार में बदल रहीं ग्रामीण महिलाएं, ऑनलाइन बाजार तक पहुंचने की तैयारी

मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर। रक्षाबंधन से पहले मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले की ग्रामीण महिलाओं ने अपने हुनर को कमाई का जरिया बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं इन दिनों हस्तनिर्मित और डिजाइनर राखियां तैयार करना सीख रही हैं। कोशिश सिर्फ स्थानीय बाजार में राखियां बेचने की नहीं, बल्कि सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए इन उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने की भी है।

बिहान योजना के तहत आयोजित प्रशिक्षण में महिलाओं को राखी बनाने की तकनीक के साथ उत्पाद की डिजाइनिंग, फिनिशिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग के तरीके बताए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य महिलाओं को ऐसा कौशल देना है, जिसे वे त्योहार के सीजन में स्वरोजगार और अतिरिक्त आय के साधन के रूप में इस्तेमाल कर सकें।

डिजाइन से पैकेजिंग तक सीख रहीं कारोबार की बारीकियां

प्रशिक्षण में महिलाओं को अलग-अलग डिजाइन की राखियां बनाने, रंगों का बेहतर संयोजन करने और सजावट के जरिए उत्पाद को आकर्षक बनाने की तकनीक सिखाई जा रही है। इसके अलावा फिनिशिंग और पैकेजिंग पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि स्थानीय स्तर पर तैयार राखियां बाजार में मौजूद दूसरे उत्पादों से मुकाबला कर सकें।

महिलाओं को केवल उत्पाद तैयार करने तक सीमित रखने के बजाय बिक्री और मार्केटिंग की जानकारी भी दी जा रही है। इसके पीछे कोशिश यह है कि स्वयं सहायता समूह उत्पादन से लेकर बिक्री तक की पूरी प्रक्रिया को समझ सकें।

गांव में बनेगी राखी, डिजिटल प्लेटफॉर्म से मिलेगा बाजार

इस पहल का एक अहम हिस्सा डिजिटल मार्केटिंग है। प्रशिक्षण में महिलाओं को सोशल मीडिया के जरिए अपने उत्पादों के प्रचार और ऑनलाइन बिक्री से जुड़ी जानकारी दी जा रही है।

प्रशिक्षण ले रही महिलाओं की योजना फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए अपनी राखियों को ग्राहकों तक पहुंचाने की है। इसके अलावा मीशो जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से बिक्री की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी।

डिजिटल माध्यम से जुड़ने का फायदा यह हो सकता है कि गांव में तैयार उत्पादों को केवल स्थानीय हाट-बाजार पर निर्भर न रहना पड़े और उन्हें जिले तथा प्रदेश से बाहर के खरीदारों तक पहुंचने का मौका मिले।

रक्षाबंधन से आगे भी कारोबार बढ़ाने की तैयारी

महिलाओं की योजना इस हुनर को केवल राखी निर्माण तक सीमित रखने की नहीं है। वे आने वाले समय में दीपावली, तीज और करवा चौथ समेत अन्य त्योहारों के लिए भी हस्तनिर्मित और सजावटी उत्पाद तैयार करना चाहती हैं।

इससे स्वयं सहायता समूहों के पास साल के अलग-अलग समय में बाजार की मांग के मुताबिक उत्पाद तैयार करने और आय अर्जित करने का अवसर बन सकता है।

घर की जिम्मेदारियों के बीच कमाई की नई राह

प्रशिक्षण में शामिल महिलाओं के मुताबिक, नया कौशल सीखने से उन्हें घर की जिम्मेदारियों के साथ आर्थिक गतिविधियों से जुड़ने का अवसर मिल रहा है। राखी निर्माण उनके लिए छोटे स्तर से कारोबार शुरू करने का एक माध्यम बन सकता है।

महिलाओं का मानना है कि यदि प्रशिक्षण के साथ बाजार और बिक्री के पर्याप्त अवसर मिलें तो स्वयं सहायता समूहों के जरिए तैयार उत्पादों को बड़े स्तर तक पहुंचाया जा सकता है।

प्रशासन का फोकस महिला स्वरोजगार पर

जिले में यह प्रशिक्षण कलेक्टर संतन देवी जांगड़े के मार्गदर्शन और जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी अंकिता सोम के नेतृत्व में कराया जा रहा है। बिहान योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को रोजगारपरक कौशल और बाजार से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है।

रक्षाबंधन से पहले शुरू हुई यह पहल ग्रामीण महिलाओं के लिए त्योहार को आर्थिक अवसर में बदलने की कोशिश है। यदि तैयार राखियों को स्थानीय और डिजिटल बाजार में बेहतर प्रतिक्रिया मिलती है, तो यह छोटे स्तर पर शुरू हुआ काम महिलाओं के लिए नियमित स्वरोजगार की राह भी खोल सकता है।

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