चिरमिरी। कभी चिरमिरी की शान, पहचान और आर्थिक गतिविधियों का मजबूत केंद्र रहा गोल्हापानी वक्त के साथ अपनी चमक खोता चला गया। आबादी घटी, कारोबार सिमटा और बुनियादी समस्याएं क्षेत्र पर हावी होती गईं। सबसे बड़ी चुनौती बनी पेयजल की समस्या, जिसने वर्षों से स्थानीय नागरिकों की मुश्किलें बढ़ा रखी हैं। लेकिन अब इन समस्याओं को सिर्फ गिनाने नहीं, बल्कि उनके स्थायी समाधान की लड़ाई लड़ने का दावा सामने आया है।
नगर पालिक निगम चिरमिरी के एल्डरमैन दीपक कलशा ने गोल्हापानी को लेकर अपना विकास विजन सामने रखते हुए साफ कहा है कि क्षेत्र की तस्वीर बदलनी है तो सबसे पहले पानी की समस्या पर निर्णायक काम करना होगा। इसके बाद सड़क, नाली, स्वास्थ्य, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था और रोजगार के मोर्चे पर योजनाबद्ध तरीके से पहल की जाएगी।
पानी के लिए आखिर कब तक जूझेगा गोल्हापानी
गोल्हापानी में पेयजल समस्या लंबे समय से नागरिकों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। कलशा ने इसे अपनी पहली और सबसे बड़ी प्राथमिकता बताते हुए पुरानी जल टंकियों की मरम्मत कर उन्हें पुनः संचालित कराने की दिशा में प्रयास करने की बात कही है।
जहां मौजूदा व्यवस्था पर्याप्त नहीं होगी, वहां नई पाइपलाइन और अतिरिक्त जलापूर्ति व्यवस्था के लिए संबंधित विभागों से समन्वय कर कार्ययोजना तैयार कराने की पहल होगी।
संदेश साफ है—गोल्हापानी को पानी के संकट से स्थायी राहत चाहिए, केवल अस्थायी इंतजाम नहीं।
कभी आबादी से गुलजार था क्षेत्र, आज सिमट गई रौनक
एक दौर था जब गोल्हापानी चिरमिरी के सबसे बड़े और अधिक आबादी वाले इलाकों में शुमार होता था। कोयला उद्योग की गतिविधियां तेज थीं, बाजारों में रौनक थी और बड़ी संख्या में परिवार यहां निवास करते थे।
लेकिन समय बदला और परिस्थितियों के साथ आबादी भी कम होती गई। इसका सीधा असर स्थानीय व्यापार और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ा। जिस गोल्हापानी में कभी चहल-पहल उसकी पहचान थी, वही क्षेत्र आज अपने पुराने वैभव की वापसी का इंतजार कर रहा है।
सरकारी कार्यालय बने तो बाजार को मिल सकती है नई ताकत
कलशा ने गोल्हापानी में किसी महत्वपूर्ण केंद्रीय अथवा क्षेत्रीय सरकारी कार्यालय की स्थापना की मांग उठाने की बात कही है।
उनका तर्क है कि सरकारी कार्यालय की स्थापना केवल प्रशासनिक सुविधा तक सीमित नहीं रहेगी। इससे लोगों की आवाजाही बढ़ेगी, स्थानीय दुकानदारों और छोटे कारोबारियों को फायदा होगा तथा युवाओं के लिए प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी तैयार हो सकते हैं।
टूटी व्यवस्था नहीं, मजबूत बुनियादी ढांचा चाहिए
गोल्हापानी के विकास की नई रूपरेखा में सड़क, नाली और साफ-सफाई को भी प्राथमिकता देने की बात कही गई है। आवश्यक निर्माण कार्यों को गति दिलाने के साथ स्वच्छता व्यवस्था को अधिक मजबूत करने की पहल होगी।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में सुविधाएं बेहतर कराने की दिशा में भी प्रयास किए जाने की बात है, ताकि छोटी-छोटी स्वास्थ्य जरूरतों के लिए नागरिकों को अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े।
धार्मिक और सार्वजनिक स्थलों पर अंधेरे से भी मिलेगी निजात
मंदिर, मस्जिद और चर्च सहित क्षेत्र के प्रमुख सार्वजनिक एवं धार्मिक स्थलों के आसपास बेहतर प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित कराने की पहल भी विकास एजेंडे में शामिल है। इससे धार्मिक स्थलों की व्यवस्था के साथ रात में नागरिकों की सुरक्षा और आवागमन भी बेहतर हो सकेगा।
रोजगार चाहिए तो स्थानीय अर्थव्यवस्था को देनी होगी ताकत
गोल्हापानी की पुरानी रौनक वापस लाने के लिए केवल निर्माण कार्य पर्याप्त नहीं होंगे। इसी को ध्यान में रखते हुए लघु उद्योग, गृह उद्योग और महिला स्वरोजगार को बढ़ावा देने की बात कही गई है।
महिला स्व-सहायता समूहों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने, स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने और छोटे उद्यमों को प्रोत्साहित करने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे। मकसद है कि रोजगार की तलाश में केवल बाहर देखने के बजाय गोल्हापानी में ही आर्थिक अवसर पैदा हों।
“सिर्फ विकास नहीं, गोल्हापानी का गौरव वापस चाहिए”
दीपक कलशा ने अपने संकल्प को स्पष्ट करते हुए कहा कि लक्ष्य महज कुछ निर्माण कार्य कराना नहीं है, बल्कि गोल्हापानी की पुरानी पहचान और गौरव को पुनः स्थापित करना है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि पेयजल से लेकर रोजगार तक सामने रखे गए इस विकास एजेंडे को धरातल पर कितनी तेजी से उतारा जाता है। क्योंकि गोल्हापानी को अब घोषणाओं से ज्यादा परिणामों की जरूरत है—ऐसे परिणाम, जो लोगों की जिंदगी में दिखाई दें और क्षेत्र की खोई रौनक वापस ला सकें।










