चिरमिरी | छत्तीसगढ़ हेडलाइन एमसीबी जिले के चिरमिरी क्षेत्र में वर्षों से धधक रही कोयला खदानों की आग अब स्थानीय लोगों के लिए गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। बरसात के मौसम में कई इलाकों में जमीन की दरारों और खदानों के आसपास से धुआं व गैस निकलने की शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इससे वातावरण लगातार प्रदूषित हो रहा है और लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भूमिगत कोयला परतों में आग लगने के बाद यदि दरारों या वर्षा के पानी के माध्यम से ऑक्सीजन अंदर पहुंचती है, तो आग और भड़क सकती है। ऐसी स्थिति में कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड सहित अन्य हानिकारक गैसें और धुआं बाहर निकल सकता है, जो पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि SECL द्वारा कोयले का उत्पादन तो लगातार किया जा रहा है, लेकिन खदानों में लगी आग और उससे निकलने वाली जहरीली गैसों को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम दिखाई नहीं दे रहे हैं। उनका आरोप है कि यदि समय रहते आग पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि कोयला खदानों में लगी आग केवल खनिज संपदा का नुकसान नहीं करती, बल्कि जहरीली गैसों के उत्सर्जन, भूमि धंसने (Subsidence) और वायु प्रदूषण जैसी गंभीर समस्याएं भी पैदा कर सकती है।
अब क्षेत्रवासियों की मांग है कि SECL प्रबंधन, जिला प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और संबंधित एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों का संयुक्त निरीक्षण कर गैस उत्सर्जन की वैज्ञानिक जांच कराएं तथा लोगों की सुरक्षा के लिए तत्काल ठोस कदम उठाएं।










