जांजगीर-चांपा। ठाकुर छेदीलाल बैरिस्टर जिला अस्पताल में महज तीन दिनों में ₹1.10 लाख के डीजल खर्च को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। जांजगीर-चांपा विधायक ब्यास कश्यप ने जिला अस्पताल प्रबंधन पर जनरेटर संचालन के नाम पर डीजल खरीदी में बड़े पैमाने पर अनियमितता का आरोप लगाया है। विधायक का दावा है कि सरकारी डीजल का उपयोग भाजपा नेताओं के निजी वाहनों में भी किया गया। वहीं भाजपा ने इन आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद और राजनीतिक साजिश बताया है।
विधायक ब्यास कश्यप ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. बी.एल. जागृति के चार माह के कार्यकाल में हुई डीजल खरीदी की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि लगातार बिजली कटौती का लाभ उठाकर जनरेटर संचालन के नाम पर सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका है। उन्होंने संबंधित पेट्रोल पंप के सीसीटीवी फुटेज और डीजल वितरण रिकॉर्ड की जांच कराने की भी मांग की है।
भाजपा ने आरोपों को बताया राजनीति से प्रेरित
विधायक के आरोपों के बाद भाजपा संगठन में भी हलचल तेज हो गई। भाजपा जिला अध्यक्ष अम्बेश जांगड़े ने सभी आरोपों को तथ्यहीन बताते हुए कहा कि यदि किसी भाजपा नेता ने जिला अस्पताल की पर्ची से डीजल भरवाया है तो विधायक उसका नाम सार्वजनिक करें। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि जांच में भाजपा नेताओं की कोई संलिप्तता नहीं मिलती है तो पार्टी मानहानि का दावा करने पर विचार करेगी।
सिविल सर्जन ने दी सफाई
जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. बी.एल. जागृति ने भी विधायक के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि अस्पताल परिसर में तीन जनरेटर स्थापित हैं और तीनों के संचालन में प्रति घंटे लगभग 50 लीटर डीजल की खपत होती है। हाल के दिनों में लगातार बिजली की आवाजाही के कारण मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसलिए आवश्यकता के अनुसार जनरेटर चलाए गए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी भाजपा नेता के वाहन में जिला अस्पताल की पर्ची से डीजल भराए जाने का आरोप पूरी तरह गलत है।
पहले भी विवादों में रहा जिला अस्पताल
गौरतलब है कि जिला अस्पताल में जीवन दीप समिति, भर्ती प्रक्रिया और परिवार नियोजन मद में कथित अनियमितताओं का मामला पहले भी विधानसभा तक पहुंच चुका है, जिसकी जांच राज्य शासन स्तर पर चल रही है। अब डीजल खरीदी को लेकर उठे नए विवाद ने जिला अस्पताल प्रबंधन को एक बार फिर सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है।
फिलहाल इस पूरे मामले में आरोप और प्रत्यारोप जारी हैं। अब निगाहें प्रशासन की जांच पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि डीजल खरीदी में कोई अनियमितता हुई है या नहीं।










