आधी रात गांव में घुसा 12 हाथियों का दल, मचा हड़कंप मकान क्षतिग्रस्त, फसलें रौंदी, दहशत में बीती पूरी रात

जनकपुर (एमसीबी)। एमसीबी जिले के जनकपुर पार्क परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम ढाब में बुधवार देर रात करीब 2 बजे उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब 12 हाथियों का दल अचानक जंगल से निकलकर गांव में प्रवेश कर गया। हाथियों की चिंघाड़ और गांव में उनकी आवाजाही से ग्रामीणों में दहशत फैल गई। कई परिवार पूरी रात जागकर अपने घरों और मवेशियों की सुरक्षा करते रहे, जबकि बच्चों और बुजुर्गों में भय का माहौल बना रहा।

हाथियों ने गांव में जमकर उत्पात मचाया। एक ग्रामीण का मकान क्षतिग्रस्त हो गया, जबकि कई किसानों की खेतों में खड़ी धान सहित अन्य फसलों को भी रौंद दिया। अचानक हुए इस हमले से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचा है। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि या घायल होने की सूचना नहीं है।

घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने ग्रामीणों के सहयोग से हाथियों को आबादी से दूर ले जाने का अभियान शुरू किया। काफी देर तक चले प्रयास के बाद हाथियों के दल को सुरक्षित रूप से वापस जंगल की ओर खदेड़ दिया गया, जिसके बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।

वन विभाग के अनुसार, हाथियों का दल भोजन और पानी की तलाश में जंगल से निकलकर गांव तक पहुंच गया था। प्रभावित क्षेत्र का सर्वे कराया जा रहा है और मकान व फसलों को हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है। नियमानुसार प्रभावित लोगों को सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।

वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि हाथियों के दिखाई देने पर घबराएं नहीं और न ही उन्हें भगाने या उनके नजदीक जाने का प्रयास करें। ऐसी स्थिति में तुरंत वन विभाग को सूचना दें, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके। विभाग की टीमें लगातार हाथियों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं और जंगल से लगे गांवों में सतर्कता बढ़ा दी गई है।

गौरतलब है कि एमसीबी जिले के वन क्षेत्रों से लगे गांवों में पिछले कुछ समय से जंगली हाथियों की आवाजाही लगातार बढ़ी है। मानसून के दौरान भोजन और पानी की तलाश में हाथियों का आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख करना आम हो गया है। ऐसे में वन विभाग ग्रामीणों को सतर्क रहने और विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करने की लगातार अपील कर रहा है, ताकि मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को कम किया जा सके।

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