सरगुजा कलेक्ट्रेट परिसर से ₹3000 में कबाड़ बिक्री पर सवाल, बिना टेंडर कबाड़ी को देने का आरोप; वीडियो वायरल

अंबिकापुर/सरगुजा। सरगुजा कलेक्ट्रेट परिसर से कथित तौर पर बिना निर्धारित प्रक्रिया अपनाए सरकारी कबाड़ बेचे जाने का मामला सामने आया है। कबाड़ से लदा ठेला कलेक्ट्रेट परिसर से बाहर ले जाए जाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद सरकारी संपत्ति के निस्तारण की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं। बताया जा रहा है कि कलेक्ट्रेट परिसर स्थित अंत्यावसायी विभाग की बिल्डिंग में मरम्मत कार्य के बाद लोहे की छड़ सहित अन्य स्क्रैप निकला था। आरोप है कि इस कबाड़ को नियमानुसार नीलामी अथवा निर्धारित प्रक्रिया अपनाए बिना ही एक कबाड़ी को लगभग ₹3000 में बेच दिया गया।

ठेले पर कबाड़ ले जाते देख लोगों ने रोका

मामला उस समय चर्चा में आया जब एक कबाड़ी ठेले पर स्क्रैप लोड कर कलेक्ट्रेट परिसर से ले जा रहा था। वहां मौजूद लोगों ने उसे रोककर कबाड़ के संबंध में पूछताछ की। वायरल वीडियो में कबाड़ी कथित तौर पर यह कहते हुए सुनाई दे रहा है कि विभाग की एक महिला अधिकारी ने उसे ₹3000 में कबाड़ दिया है। इसके बाद सरकारी परिसर से कबाड़ बिक्री की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े हो गए।

विभागीय अधिकारी ने कबाड़ बेचने की बात स्वीकारी

मामले को लेकर विभाग के अधिकारियों से सवाल किए जाने पर बताया गया कि कबाड़ ₹3000 में कबाड़ी को दिया गया है और प्राप्त राशि को शासकीय खजाने में जमा कराया जाएगा। हालांकि बड़ा सवाल यह है कि सरकारी संपत्ति और स्क्रैप के निस्तारण के लिए लागू प्रक्रिया का पालन किया गया या नहीं? यदि नीलामी, निविदा अथवा सक्षम अधिकारी की अनुमति आवश्यक थी, तो उससे संबंधित प्रक्रिया और दस्तावेज सार्वजनिक किए जाने चाहिए।

दिनदहाड़े कलेक्ट्रेट परिसर में पहुंचा कबाड़ी, उठाकर ले गया स्क्रैप

मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि कबाड़ी ठेला लेकर कलेक्ट्रेट परिसर के अंदर पहुंचा और वहां से सरकारी स्क्रैप लोड कर बाहर ले जाने लगा। कलेक्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण शासकीय परिसर में इस तरह कबाड़ उठाए जाने का वीडियो सामने आने से प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल उठ रहे हैं। अब यह जांच का विषय है कि कबाड़ की वास्तविक कीमत कितनी थी, उसका मूल्यांकन किसने किया, बिक्री की अनुमति किस स्तर पर दी गई और ₹3000 की कीमत किस आधार पर तय की गई।

वायरल वीडियो के बाद उठे कई सवाल

इस पूरे मामले में यह स्पष्ट होना बाकी है कि सरकारी कबाड़ के निस्तारण के लिए आवश्यक नियमों का पालन किया गया था या नहीं। संबंधित विभाग द्वारा प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज सामने आने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने मामले को चर्चा में ला दिया है और अब निगाहें जिला प्रशासन पर हैं कि वह इस मामले की जांच कराता है या विभाग की कार्रवाई को नियमानुसार मानता है।

 

 

Leave a Comment

और पढ़ें

error: Content is protected !!