2019 में हाईटेंशन लाइन की चपेट में हुई थी मौत, 2020 में लाइन शिफ्ट करने का आदेश; राशि और सामग्री जमा होने के बावजूद वर्षों से अधर में काम
मनेन्द्रगढ़। शहर के जे.के.डी. रोड स्थित ‘आदित्य एंड ब्रदर्स वर्कशॉप’ के समीप से गुजर रही 33 KV हाईटेंशन बिजली लाइन अब सिर्फ एक बिजली लाइन नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल बन चुकी है। वर्ष 2019 में इसी लाइन की चपेट में आने से एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है। इसके बाद न्यायालय ने लाइन को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने का आदेश भी दिया, लेकिन आरोप है कि अदालती आदेश, विभागीय प्रक्रिया, शुल्क जमा कराने और लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद आज तक लाइन नहीं हटाई गई। मामले को लेकर आवेदक अजीत सिंह ने एक बार फिर कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत कर जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित ठेकेदार की भूमिका की जांच तथा तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
2019 की मौत के बाद भी नहीं जागा सिस्टम?
आवेदक के अनुसार वर्ष 2019 में वर्कशॉप परिसर में 33 KV हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से एक व्यक्ति की दर्दनाक मौत हो गई थी। हादसे के बाद मामला अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), मनेन्द्रगढ़ के न्यायालय तक पहुंचा। आवेदक का कहना है कि न्यायालय द्वारा मामले में लाइन को तत्काल सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने का आदेश दिया गया था। इसके बाद बिजली विभाग की निर्धारित प्रक्रियाएं भी पूरी की गईं।
लेकिन सवाल अब भी वही है—जब हादसा हो चुका था, न्यायालय का आदेश हो चुका था और विभागीय प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी, तो आखिर वर्षों बाद भी 33 KV लाइन उसी जगह क्यों मौजूद है?
₹1.09 लाख विभाग में जमा, फिर भी काम शून्य
आवेदक के मुताबिक लाइन शिफ्टिंग के लिए विद्युत वितरण कंपनी में ₹1,09,349 की राशि जमा की गई। इसके अलावा मौके पर कार्य के लिए—
7 विद्युत पोल
1 गाड़ी मिट्टी
1 गाड़ी रेता
30 बोरी सीमेंट
उपलब्ध कराया गया।
आवेदक का आरोप है कि मजदूरी एवं अन्य प्रक्रियात्मक खर्च के नाम पर संबंधित ठेकेदार सतीश शामनानी को ₹2,30,000 की नगद राशि भी दी गई। इसके बावजूद शिकायतकर्ता के अनुसार आज तक लाइन शिफ्टिंग का काम शुरू नहीं हुआ।
राशि और सामग्री गई कहां? उठ रहे हैं गंभीर सवाल
मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि विभाग को शुल्क जमा किया गया, निर्माण सामग्री उपलब्ध कराई गई और ठेकेदार को कथित तौर पर लाखों रुपये का भुगतान किया गया, तो फिर जमीन पर काम क्यों दिखाई नहीं दे रहा?
क्या कार्य के लिए जारी राशि और सामग्री का विधिवत हिसाब हुआ?
क्या ठेकेदार ने विभाग के निर्देशों के अनुसार काम किया?
यदि काम नहीं हुआ तो भुगतान किस आधार पर किया गया?
और सबसे अहम—2019 की मौत के बाद भी उसी स्थान पर 33 KV लाइन को बनाए रखने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
इन सवालों का जवाब बिजली विभाग और संबंधित अधिकारियों की ओर से सामने आना जरूरी है।
कोर्ट के आदेश की अवमानना का भी आरोप
आवेदक का कहना है कि वर्ष 2025 में न्यायालय के आदेश की अवमानना को लेकर शिकायत भी दर्ज कराई गई थी। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।
बताया गया है कि 25 नवंबर 2025 और 4 अगस्त 2026 को भी जनदर्शन में आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की गई, लेकिन शिकायतकर्ता के अनुसार अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई।
11 अगस्त को फिर जनदर्शन में पहुंचा मामला
लगातार कार्रवाई नहीं होने से परेशान आवेदक अजीत सिंह ने 11 अगस्त 2026 को पुनः कलेक्टर जनदर्शन में आवेदन प्रस्तुत किया। आवेदन का टोकन क्रमांक 2290126000955 बताया गया है। आवेदक ने इस बार मामले को लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत शीघ्र निराकरण करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने न्यायालय के आदेश का पालन नहीं किए जाने के मामले में संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार की भूमिका की निष्पक्ष जांच तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी एवं प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की है।
एक और हादसे का इंतजार तो नहीं?
यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि यहां पहले ही एक व्यक्ति की जान जा चुकी है। ऐसे में किसी संभावित दुर्घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले से सामने आए खतरे को खत्म करना प्रशासन और बिजली विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। सवाल सिर्फ एक लाइन हटाने का नहीं है। सवाल यह है कि एक जानलेवा हाईटेंशन लाइन को हटाने के लिए अदालत का आदेश, विभागीय प्रक्रिया और धनराशि जमा होने के बाद भी यदि वर्षों तक काम नहीं होता, तो जवाबदेही तय कौन करेगा?
मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित दस्तावेजों की आधिकारिक जांच आवश्यक है। अब निगाहें जिला प्रशासन और विद्युत विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं।










