नाबालिग से दुष्कर्म के बाद फर्जी पहचान का खेल, नवजात को ₹1.10 लाख में सौंपने का आरोप; 6 गिरफ्तार

रायपुर। न्यू राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र से सामने आया मामला सिर्फ नाबालिग के साथ कथित लगातार दुष्कर्म तक सीमित नहीं है। पुलिस जांच में उम्र और वैवाहिक स्थिति बदलकर उसकी पहचान छिपाने, फर्जी दस्तावेजों के सहारे अस्पताल में प्रसव कराने और जन्म के बाद नवजात को कथित तौर पर दूसरे व्यक्ति को सौंपने की पूरी कड़ी सामने आई है। पुलिस ने मामले में नाबालिग के पिता और बुआ समेत छह आरोपितों को गिरफ्तार किया है। जांच के दौरान नवजात को भी बरामद कर लिया गया है। पुलिस अब कथित लेनदेन और इस पूरे मामले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।

2023 में शुरू हुआ कथित शोषण

पुलिस के मुताबिक, पीड़िता की उम्र घटना के दौरान 16 वर्ष से कम थी। शिकायत के अनुसार वर्ष 2023 में उसके पिता ने अमलीडीह स्थित रिश्तेदार के घर में जान से मारने की धमकी देकर उसके साथ कथित दुष्कर्म किया। पीड़िता का आरोप है कि घटना के बाद भी उसे धमकाया जाता रहा और शोषण जारी रहा। इसी दौरान वह गर्भवती हो गई।

गर्भपात की दवा देने का आरोप

पुलिस को दिए बयान के अनुसार, पीड़िता ने गर्भवती होने की जानकारी अपनी बुआ को दी थी। आरोप है कि जानकारी पिता तक पहुंचने के बाद गर्भपात की दवा लाई गई और मारपीट कर उसे दवा खिलाई गई। इसके बाद भी कथित शोषण जारी रहा। वर्ष 2025 में पीड़िता दोबारा गर्भवती हो गई। इस बार उसकी वास्तविक पहचान और उम्र को छिपाने की कथित तैयारी शुरू हुई।

उम्र बढ़ाकर बनाया गया बालिग और विवाहित

जांच में पुलिस को कथित तौर पर पता चला कि पीड़िता की वास्तविक उम्र छिपाकर उसे बालिग और विवाहित दर्शाने वाले दस्तावेज तैयार किए गए। पुलिस के अनुसार, इसी पहचान के आधार पर उसे अलग-अलग लोगों के संपर्क में रखा गया और बाद में चंगोराभाठा स्थित वासुदेव अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में ऑपरेशन के जरिए उसने एक बेटे को जन्म दिया।

प्रसव के बाद नवजात को सौंपने का आरोप

पुलिस जांच में सबसे गंभीर आरोप नवजात को दूसरे व्यक्ति को सौंपे जाने से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, प्रसव के बाद बच्चे को करीब 1.10 लाख रुपये में दूसरे व्यक्ति को दिए जाने की बात सामने आई है। जांच के दौरान पुलिस ने नवजात को बरामद कर लिया। अब पुलिस कथित रकम के लेनदेन, बच्चे को लेने वाले व्यक्ति और इस प्रक्रिया में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

नर्सों की भूमिका पर भी पुलिस की नजर

मामले में गिरफ्तार दो महिला आरोपितों की पहचान योगिता राय उर्फ गीता राय और बरखा वर्मा उर्फ वर्षा मंडल के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार दोनों नर्स के रूप में काम करती हैं और अलग-अलग अस्पतालों में उनका आना-जाना था। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि नाबालिग को बालिग और विवाहित बताकर अस्पताल में भर्ती कराने, दस्तावेज तैयार कराने और प्रसव की प्रक्रिया में उनकी क्या भूमिका थी।

क्या पहले भी हुआ ऐसा? जांच का दायरा बढ़ा

पुलिस अब मामले की जांच को सिर्फ एक घटना तक सीमित नहीं रख रही है। आरोपितों के मोबाइल फोन, संपर्कों और अस्पतालों से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। जांच एजेंसियां यह भी पता कर रही हैं कि कहीं इससे पहले भी किसी महिला या नाबालिग की उम्र और पहचान बदलकर अस्पताल में भर्ती कराने अथवा नवजात को किसी अन्य व्यक्ति को सौंपने जैसी घटनाएं तो नहीं हुईं।

6 गिरफ्तार, दो मोबाइल जब्त

न्यू राजेंद्र नगर पुलिस ने मामले में छह आरोपितों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपितों में पीड़िता का पिता, उसकी बुआ, रोहित कुमार राय, साहेब मंडल, योगिता राय उर्फ गीता राय और बरखा वर्मा उर्फ वर्षा मंडल शामिल हैं। पुलिस ने आरोपितों के कब्जे से दो मोबाइल फोन जब्त किए हैं। इन मोबाइल फोन और अन्य दस्तावेजों की जांच के जरिए पुलिस कथित अपराध की पूरी कड़ी जोड़ने में जुटी है।

  • जांच के केंद्र में अब ये सवाल
    फर्जी दस्तावेज किसने तैयार किए?
    अस्पताल में उम्र और वैवाहिक स्थिति की पुष्टि किस आधार पर हुई?
    नवजात को कथित तौर पर ₹1.10 लाख में किसे सौंपा गया?
    रकम का भुगतान किसने और किस माध्यम से किया?
    इस पूरे मामले में अस्पताल से जुड़े और कितने लोग शामिल हैं?
    क्या इससे पहले भी इसी तरह की कोई घटना हुई है?

पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और साक्ष्यों के आधार पर मामले में आगे और कार्रवाई की जा सकती है।

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