अंबिकापुर में बारिश का असर: महामाया मंदिर परिसर का पुराना बरगद भरभराकर गिरा, बाल-बाल बचे श्रद्धालु

अंबिकापुर। सरगुजा की आस्था का प्रमुख केंद्र मां महामाया मंदिर बुधवार सुबह अचानक एक बड़े हादसे की आशंका से दहल उठा। मंदिर परिसर में लंबे समय से खड़ा विशाल बरगद का पेड़ सुबह करीब 9 बजे अचानक धराशायी हो गया। राहत की बात यह रही कि घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। बताया जा रहा है कि यह बरगद का पेड़ करीब सौ साल पुराना था और लंबे समय से मंदिर परिसर की पहचान का हिस्सा बना हुआ था। बुधवार को अंबिकापुर में रुक-रुककर बारिश हो रही थी। इसी दौरान भारी बारिश के बीच पेड़ अचानक जमीन पर आ गिरा।

बारिश के बीच अचानक टूटा सहारा

सुबह का समय होने के कारण मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं और लोगों की आवाजाही रहती है। ऐसे में विशाल पेड़ का अचानक गिरना किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता था। हालांकि, संयोग से पेड़ गिरने की घटना में किसी व्यक्ति के घायल होने की जानकारी सामने नहीं आई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक बरगद का यह पेड़ काफी लंबे समय से परिसर में मौजूद था और मंदिर आने वाले लोगों के लिए इसकी छांव भी एक परिचित दृश्य थी। पेड़ के धराशायी होने से मंदिर परिसर का एक पुराना दृश्य भी अचानक बदल गया।

बारिश के बीच गिरा पुराना वृक्ष

अंबिकापुर में पिछले कुछ दिनों से बारिश का दौर जारी है। उपलब्ध मौसम पूर्वानुमान में भी 19 अगस्त को अंबिकापुर में बारिश की संभावना दर्ज की गई थी। बारिश के दौरान जमीन में नमी बढ़ने और पुराने पेड़ों की जड़ों पर असर पड़ने से ऐसे पेड़ों के गिरने का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, इस पेड़ के गिरने का वास्तविक तकनीकी कारण संबंधित विभाग की जांच या स्थल निरीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगा।

आस्था से जुड़ा रहा है परिसर का यह पेड़

मां महामाया मंदिर अंबिकापुर की धार्मिक पहचान से गहराई से जुड़ा हुआ है। उपलब्ध ऐतिहासिक स्रोतों के अनुसार मंदिर अंबिकापुर की पूर्वी पहाड़ी पर स्थित प्राचीन धार्मिक स्थल है और इसी महामाया/अंबिका देवी के नाम पर शहर का नाम अंबिकापुर पड़ा। मंदिर में नवरात्रि सहित विभिन्न अवसरों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

मंदिर परिसर में मौजूद विशाल बरगद के वृक्ष का उल्लेख स्थानीय स्रोतों में भी मिलता है। ऐसे में इसका गिरना केवल एक पेड़ के गिरने की घटना नहीं, बल्कि मंदिर परिसर के पुराने स्वरूप से जुड़ी एक तस्वीर के बदल जाने जैसा है।

अब उठेगा सुरक्षा का सवाल

घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल मंदिर परिसर में मौजूद अन्य पुराने और विशाल पेड़ों की सुरक्षा को लेकर भी उठ सकता है। क्या परिसर में ऐसे दूसरे पेड़ों का भी निरीक्षण किया गया है? क्या बारिश के मौसम से पहले पुराने पेड़ों की मजबूती की जांच की गई थी? इन सवालों पर मंदिर प्रबंधन और संबंधित विभाग की ओर से स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।

फिलहाल सबसे बड़ी राहत यही है कि सुबह करीब 9 बजे हुई इस घटना में किसी जनहानि की खबर नहीं है।

छत्तीसगढ़ हेडलाइन की नजर में सवाल:
एक सदी से अधिक समय तक मंदिर परिसर का हिस्सा रहे इस बरगद के गिरने के बाद क्या अब परिसर में मौजूद पुराने पेड़ों का सुरक्षा ऑडिट कराया जाएगा? यह आने वाले दिनों में देखने वाली बात होगी।

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