बैकुंठपुर/सूरजपुर। छत्तीसगढ़ हेडलाइन 29 जुलाई। विश्व बाघ दिवस (World Tiger Day 2026) के अवसर पर छत्तीसगढ़ में बाघ संरक्षण को लेकर एक ओर जागरूकता अभियान चलाया गया, तो दूसरी ओर वन विभाग ने वन्यजीव तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। एक ही दिन सामने आईं ये दो घटनाएं बाघ संरक्षण की चुनौती और उसके लिए किए जा रहे प्रयासों की दो अलग-अलग तस्वीरें पेश करती हैं।
मेंड्रा में बच्चों को दिया गया बाघ संरक्षण का संदेश
गुरुघासीदास तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व, बैकुंठपुर द्वारा टाइगर रिजर्व से लगे सरहदी गांव मेंड्रा के शासकीय मिडिल स्कूल में विश्व बाघ दिवस के अवसर पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में स्कूली बच्चों को प्रोजेक्टर के माध्यम से बाघों, उनके प्राकृतिक आवास और जैव विविधता पर आधारित डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई। वन अधिकारियों ने बाघों की घटती संख्या, पर्यावरण संतुलन में उनकी भूमिका तथा वन्यजीव संरक्षण की आवश्यकता पर विस्तार से जानकारी दी।
बच्चों में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से क्विज प्रतियोगिता और पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में गुरुघासीदास तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व के एसडीओ दीपक पटेल, वन परिक्षेत्र अधिकारी श्याम सिंह सहित वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने कहा कि बाघों और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा में स्थानीय समुदायों की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है।
विश्व बाघ दिवस पर ही सूरजपुर में वन्यजीव तस्करों पर बड़ी कार्रवाई
विश्व बाघ दिवस के दिन ही छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से वन्यजीव तस्करी का बड़ा मामला सामने आया। वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों के कब्जे से एक बाघ की खाल, पैंगोलिन के शल्क (स्केल) तथा घटना में प्रयुक्त हथियार बरामद किए गए।
प्रारंभिक जांच में बरामद बाघ की खाल करीब पांच से छह माह पुरानी बताई गई है। वन विभाग पूरे नेटवर्क की जांच कर रहा है और यह पता लगाया जा रहा है कि आरोपियों के तार किन-किन राज्यों और तस्करी गिरोहों से जुड़े हो सकते हैं।
दो घटनाएं, एक बड़ा संदेश
एक ओर स्कूलों में बच्चों को बाघ संरक्षण का पाठ पढ़ाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर वन्यजीव तस्कर अब भी बाघ जैसे दुर्लभ वन्यजीवों का शिकार कर अवैध कारोबार में लगे हुए हैं। यही कारण है कि संरक्षण के साथ-साथ तस्करी के खिलाफ कठोर कार्रवाई भी उतनी ही जरूरी मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों के आसपास रहने वाले स्थानीय समुदाय वन्यजीवों के व्यवहार और उनके आवास से सबसे अधिक परिचित होते हैं। यदि इन्हें संरक्षण अभियान से जोड़ा जाए तो बाघों और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा को और मजबूत बनाया जा सकता है
क्या है विश्व बाघ दिवस का महत्व?
विश्व बाघ दिवस की शुरुआत 29 जुलाई 2010 को रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में आयोजित अंतरराष्ट्रीय बाघ शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। इसका उद्देश्य अवैध शिकार, वन्यजीव तस्करी और प्राकृतिक आवास के लगातार घटने से संकट में पहुंचे बाघों के संरक्षण के लिए वैश्विक स्तर पर सहयोग बढ़ाना है।
World Tiger Day 2026 की थीम है—”स्वदेशी लोगों और स्थानीय समुदायों को केंद्र में रखकर बाघों के अस्तित्व और भविष्य को सुरक्षित बनाना।
छत्तीसगढ़ हेडलाइन विश्लेषण
विश्व बाघ दिवस पर छत्तीसगढ़ से सामने आई दोनों घटनाएं यह स्पष्ट करती हैं कि बाघ संरक्षण केवल जागरूकता कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रह सकता। जंगलों में रहने वाले समुदायों की भागीदारी, आधुनिक निगरानी व्यवस्था, वन विभाग की सतर्कता और वन्यजीव तस्करी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई—इन सभी के समन्वय से ही बाघों का भविष्य सुरक्षित किया जा सकता है।










