नई दिल्ली/रायपुर। छत्तीसगढ़ हेडलाइन. भगवान शिव की आराधना, तप, त्याग और आध्यात्मिक साधना का पावन पर्व श्रावण मास (सावन) आज से शुरू हो गया। सावन के पहले ही दिन देशभर के शिव मंदिरों में आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह ब्रह्ममुहूर्त से ही श्रद्धालु जल, दूध, गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा और पुष्प लेकर मंदिरों में पहुंचे तथा विधि-विधान से भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और मंगलमय जीवन की कामना की।
देश के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों और प्रसिद्ध शिवधामों—काशी विश्वनाथ, महाकालेश्वर, केदारनाथ, बैद्यनाथ धाम, ओंकारेश्वर, त्र्यंबकेश्वर और सोमनाथ सहित हजारों शिवालयों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। मंदिर परिसरों में “हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इस पूरे माह में शिवलिंग पर जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जाप, शिव चालीसा का पाठ और सोमवार व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई शिव आराधना से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन के कष्ट दूर होते हैं।
छत्तीसगढ़ में भी दिखी शिवभक्ति की अनूठी तस्वीर
छत्तीसगढ़ के रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, अंबिकापुर, कोरबा, जशपुर, सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) समेत सभी जिलों के शिव मंदिरों में सुबह से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कई मंदिरों में विशेष रुद्राभिषेक, महाआरती, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। प्रशासन और मंदिर समितियों ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सुरक्षा, पेयजल, चिकित्सा और यातायात की विशेष व्यवस्था की है।
सावन के साथ ही कई राज्यों में कांवड़ यात्रा भी शुरू हो गई है। लाखों शिवभक्त पवित्र नदियों से जल लेकर पैदल यात्रा करते हुए भगवान शिव का अभिषेक करेंगे। राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है, जबकि विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संस्थाएं कांवड़ियों की सेवा में जुटी हुई हैं।
धर्माचार्यों का कहना है कि सावन केवल पूजा-अर्चना का महीना नहीं, बल्कि आत्मसंयम, सेवा, दान, प्रकृति संरक्षण और आध्यात्मिक जागरण का भी संदेश देता है। इस दौरान सात्विक जीवनशैली अपनाने, पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक रहने और जरूरतमंदों की सहायता करने का विशेष महत्व बताया गया है
सावन के प्रत्येक सोमवार को विशेष फलदायी माना जाता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु सोमवार का व्रत रखकर भगवान शिव की पूजा करते हैं। अविवाहित युवतियां योग्य जीवनसाथी की कामना तो विवाहित महिलाएं परिवार की सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य के लिए विशेष पूजा-अर्चना करती हैं।
बारिश, हरियाली और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर सावन का यह पावन महीना भारतीय संस्कृति, आस्था और सनातन परंपरा का जीवंत प्रतीक माना जाता है। आगामी सप्ताहों में देशभर के शिवालयों में धार्मिक आयोजनों, भजन-कीर्तन, रुद्राभिषेक और श्रद्धालुओं की भीड़ का सिलसिला लगातार जारी रहने की संभावना है।










