पिता की हत्या कर शव ठिकाने लगाने वाले बेटे को आजीवन कारावास, CCTV और तकनीकी साक्ष्यों ने दिलाई सजा

बेमेतरा | छत्तीसगढ़ हेडलाइन  छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में पिता की हत्या कर शव को ठिकाने लगाने के बहुचर्चित मामले में अदालत ने कड़ा फैसला सुनाया है। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने ग्राम सांकरा निवासी इंद्रेश साहू को अपने पिता मोतीलाल साहू की हत्या का दोषी ठहराते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और 201 (साक्ष्य नष्ट करना) के तहत आजीवन कारावास एवं अर्थदंड की सजा सुनाई है।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी ने अपने ही घर में पिता की हत्या करने के बाद अपने अपचारी (नाबालिग) की मदद से शव को नाले के कछार क्षेत्र में फेंक दिया था। इसके पीछे उद्देश्य अपराध के साक्ष्यों को मिटाना और जांच को गुमराह करना था।

मामले की जांच कर रहे विवेचक मयंक मिश्रा ने वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ते हुए मजबूत विवेचना प्रस्तुत की। पुलिस ने घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल टावर लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) सहित अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाकर अदालत में पेश किए, जिन्होंने अभियोजन पक्ष के मामले को मजबूती प्रदान की।

सुनवाई के दौरान अदालत ने तकनीकी साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पूरी श्रृंखला का परीक्षण किया। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल रहा। इसके आधार पर आरोपी इंद्रेश साहू को हत्या और साक्ष्य छिपाने का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

शासकीय अधिवक्ता एवं लोक अभियोजक शिव गोपाल श्रीवास ने बताया कि यह फैसला दर्शाता है कि वैज्ञानिक जांच, डिजिटल साक्ष्य और प्रभावी विवेचना के जरिए गंभीर अपराधों में भी दोषियों को कानून के कठघरे तक पहुंचाया जा सकता है।

इस मामले में अदालत का फैसला न केवल पीड़ित परिवार के लिए न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि हत्या जैसे जघन्य अपराधों में आधुनिक तकनीकी साक्ष्य और सशक्त पुलिस विवेचना न्यायिक प्रक्रिया में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

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