अंबिकापुर जेल के बंदी की ऑपरेशन के बाद मौत, परिजनों का फूटा गुस्सा; अस्पताल पर गंभीर आरोप, न्यायिक जांच शुरू

परिजनों का सवाल—बिना बताए क्यों हुआ ऑपरेशन? डॉक्टर बोले- आंत में था छेद, हालत बेहद गंभीर; जेल प्रशासन का दावा- नियमानुसार दी गई अनुमति

अंबिकापुर। केंद्रीय जेल अंबिकापुर में निरुद्ध 32 वर्षीय बंदी रामकेश्वर साहू की मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज के दौरान मौत के बाद मामला गरमा गया है। मौत की सूचना मिलते ही अस्पताल पहुंचे परिजनों ने इलाज और ऑपरेशन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। परिवार का आरोप है कि उन्हें विश्वास में लिए बिना रामकेश्वर का ऑपरेशन किया गया और सहमति से जुड़ी प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में है। हालांकि अस्पताल और जेल प्रशासन ने आरोपों से इनकार करते हुए मरीज की स्थिति को बेहद गंभीर और ऑपरेशन को आपातकालीन बताया है।

परिजनों का आरोप—‘हमें बताते तो तुरंत पहुंचते’

मृतक के परिजनों का कहना है कि रामकेश्वर की गंभीर हालत और ऑपरेशन के संबंध में उन्हें समय रहते जानकारी नहीं दी गई। उनका कहना है कि यदि अस्पताल या जेल प्रशासन उन्हें सूचित करता तो वे तत्काल अस्पताल पहुंच जाते।

परिवार ने ऑपरेशन से पहले सहमति और हस्ताक्षर की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं। परिजनों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि ऑपरेशन की अनुमति आखिर किससे, कब और किन परिस्थितियों में ली गई?

डॉक्टरों का जवाब—आंत में था छेद, BP बेहद कम; तत्काल ऑपरेशन था जरूरी

मेडिकल कॉलेज अस्पताल के सर्जन डॉ. मनोज भारती के मुताबिक रामकेश्वर साहू की आंत में छेद हो गया था और उसका ब्लड प्रेशर बेहद कम था। मरीज की हालत इतनी गंभीर थी कि तत्काल सर्जरी करना जरूरी हो गया था। डॉक्टरों के अनुसार जेल प्रशासन से अनुमति मिलने के बाद ऑपरेशन किया गया। सर्जरी के बाद रामकेश्वर को वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन तमाम चिकित्सकीय प्रयासों के बावजूद 1 अगस्त की सुबह उसकी मौत हो गई।

अस्पताल का कहना है कि मौत के वास्तविक चिकित्सकीय कारणों पर अभी अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। बायोप्सी रिपोर्ट और अन्य जांच के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।

2022 से जेल में था रामकेश्वर, 29 जुलाई को पेट दर्द के बाद पहुंचा अस्पताल

केंद्रीय जेल अधीक्षक अक्षय सिंह राजपूत के मुताबिक रामकेश्वर साहू वर्ष 2022 से डबल मर्डर और आर्म्स एक्ट से जुड़े मामले में केंद्रीय जेल अंबिकापुर में निरुद्ध था। 29 जुलाई को पेट दर्द की शिकायत के बाद उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया। जांच में आंत में छेद होने की बात सामने आने पर अस्पताल ने ऑपरेशन की अनुमति मांगी। जेल प्रशासन का दावा है कि मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए तत्काल अनुमति दे दी गई।

इलाज के दौरान बंदी की मौत के बाद अब मामले में न्यायिक जांच समिति गठित कर दी गई है। जेल प्रशासन के मुताबिक नियमानुसार राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भी घटना की सूचना भेजी गई है।

परिवार के आरोप बनाम डॉक्टर-जेल प्रशासन का दावा, जांच तय करेगी सच

रामकेश्वर साहू की मौत के बाद अब सवाल सिर्फ इलाज तक सीमित नहीं है। परिवार ऑपरेशन की सूचना और सहमति की प्रक्रिया पर गंभीर आरोप लगा रहा है, जबकि डॉक्टरों का दावा है कि मरीज की हालत इतनी नाजुक थी कि तत्काल सर्जरी ही उसकी जान बचाने का विकल्प थी। जेल प्रशासन भी ऑपरेशन के लिए अनुमति दिए जाने की बात कह रहा है।

अब न्यायिक जांच के सामने सबसे अहम सवाल होंगे—परिजनों को समय पर सूचना दी गई या नहीं? ऑपरेशन की अनुमति की पूरी प्रक्रिया क्या थी? चिकित्सा और जेल प्रोटोकॉल का पालन हुआ या नहीं? और रामकेश्वर की मौत का वास्तविक कारण क्या था?

परिजनों के आरोप गंभीर हैं और प्रशासन के अपने दावे हैं। ऐसे में न्यायिक जांच और मेडिकल रिपोर्ट ही तय करेगी कि इस मौत के पीछे महज गंभीर बीमारी थी या इलाज और प्रक्रिया के स्तर पर कोई चूक भी हुई।

 

छत्तीसगढ़ हेडलाइन न्यूज़ | अंबिकापुर

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