मनेन्द्रगढ़। मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने मनेन्द्रगढ़ मेडिकल कॉलेज में 50 एमबीबीएस सीटों के संचालन की अनुमति प्रदान कर दी है। मंजूरी मिलने के बाद पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है और इसे जिले के स्वास्थ्य एवं शिक्षा क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
इस उपलब्धि के बाद मेडिकल कॉलेज को लेकर राजनीतिक स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। भरतपुर-सोनहत के पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने कहा कि मेडिकल कॉलेज की परिकल्पना और प्रारंभिक प्रशासनिक प्रक्रिया पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में शुरू हुई थी। उन्होंने इससे संबंधित दस्तावेज साझा करते हुए बताया कि परियोजना की आधारशिला उसी दौरान रखी गई थी। साथ ही उन्होंने वर्तमान सरकार और प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल द्वारा मेडिकल कॉलेज को अंतिम मंजूरी दिलाने के प्रयासों की भी सराहना की।
कई चरणों से होकर पूरी हुई प्रक्रिया
मेडिकल कॉलेज की स्थापना का प्रस्ताव कई वर्षों की प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद आगे बढ़ा। पूर्व सरकार के समय इसकी घोषणा की गई, आवश्यक प्रस्ताव तैयार किए गए और भूमि चयन की प्रक्रिया शुरू हुई। शुरुआती स्तर पर एक स्थान उपयुक्त नहीं पाए जाने के बाद प्रशासन ने ग्राम चैनपुर में लगभग 33.46 हेक्टेयर (करीब 82 एकड़) शासकीय भूमि का चयन कर परियोजना के लिए आवंटित किया।
अंतिम मंजूरी में वर्तमान सरकार की भूमिका
वर्तमान सरकार के कार्यकाल में मेडिकल कॉलेज की फाइल को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग तक पहुंचाने और आवश्यक मानकों की पूर्ति के लिए लगातार प्रयास किए गए। स्वास्थ्य मंत्री एवं स्थानीय विधायक श्यामबिहारी जायसवाल ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और एनएमसी स्तर पर लगातार समन्वय स्थापित किया, जिसके बाद कॉलेज को 50 एमबीबीएस सीटों की स्वीकृति प्राप्त हुई।
इसी सत्र से शुरू होगी पढ़ाई
प्रशासनिक तैयारियों के अनुसार मेडिकल कॉलेज का संचालन प्रारंभिक चरण में अस्थायी भवन से किया जाएगा, ताकि नए शैक्षणिक सत्र से विद्यार्थियों की पढ़ाई समय पर शुरू हो सके। वहीं स्थायी परिसर का निर्माण कार्य भी निर्धारित योजना के अनुसार जारी है। भवन निर्माण पूरा होने के बाद कॉलेज को अपने पूर्ण परिसर में स्थानांतरित किया जाएगा।
क्षेत्र को मिलेगा सीधा लाभ
मेडिकल कॉलेज शुरू होने से एमसीबी जिले और आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को चिकित्सा शिक्षा के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होगा, विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी और स्थानीय लोगों को बेहतर उपचार सुविधाएं मिल सकेंगी।
विकास की निरंतर प्रक्रिया
मेडिकल कॉलेज की मंजूरी को क्षेत्र के समग्र विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह परियोजना विभिन्न चरणों में आगे बढ़ी और अलग-अलग समय पर प्रशासनिक व तकनीकी प्रक्रियाओं के बाद अब संचालन की स्थिति तक पहुंची है। स्थानीय नागरिकों को उम्मीद है कि आने वाले समय में यह संस्थान पूरे संभाग के लिए चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र बनेगा।











