120 छात्रों पर सिर्फ एक शिक्षक, बेमेतरा के जांता हाई स्कूल में शिक्षा व्यवस्था बेपटरी, अभिभावकों में बढ़ी चिंता

बेमेतर | छत्तीसगढ़ हेडलाइन

छत्तीसगढ़ में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बेमेतरा जिले के विकासखंड बेमेतरा स्थित शासकीय हाई स्कूल जांता से सामने आई तस्वीर न केवल शिक्षा विभाग के दावों की हकीकत बयां करती है, बल्कि सैकड़ों छात्रों के भविष्य को लेकर भी चिंता बढ़ाती है। यहां कक्षा 9वीं और 10वीं के लगभग 120 विद्यार्थियों की पढ़ाई महज एक शिक्षक के भरोसे चल रही है।

नया शिक्षा सत्र शुरू हुए करीब डेढ़ माह बीत चुका है, लेकिन स्कूल में अब तक अधिकांश विषयों की पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी है। वर्तमान में केवल विज्ञान विषय के शिक्षक उपलब्ध हैं, जबकि हिंदी, अंग्रेजी, गणित, सामाजिक विज्ञान समेत अन्य विषयों के शिक्षक पद रिक्त हैं। ऐसे में बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को रोज स्कूल पहुंचने के बावजूद पूरी शिक्षा नहीं मिल पा रही है।

बोर्ड परीक्षा सिर पर, लेकिन पढ़ाने वाला कोई नहीं

विद्यार्थियों का कहना है कि वे बोर्ड कक्षाओं के छात्र हैं और हर दिन पढ़ाई का नुकसान हो रहा है। समय पर शिक्षक नहीं मिलने से पाठ्यक्रम लगातार पीछे छूटता जा रहा है। उनका कहना है कि यदि जल्द शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई तो इसका सीधा असर उनके परीक्षा परिणाम और भविष्य पर पड़ेगा।

ग्रामीणों ने उठाए सरकार की घोषणाओं पर सवाल

शिक्षकों की कमी को लेकर ग्रामीणों और अभिभावकों में भी नाराजगी है। उनका कहना है कि हाल ही में शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने जांता में हायर सेकेंडरी स्कूल शुरू करने की घोषणा की थी, लेकिन जब वर्तमान हाई स्कूल में ही पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं, तो नई घोषणाएं छात्रों के लिए कितनी उपयोगी साबित होंगी? ग्रामीणों की मांग है कि पहले मौजूदा स्कूल में सभी विषयों के शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए।

100 सीटर छात्रावास भी प्रभावित

स्कूल परिसर के समीप 100 सीटर कन्या छात्रावास संचालित है, जहां दूर-दराज के गांवों की छात्राएं रहकर शिक्षा प्राप्त करती हैं। लेकिन शिक्षकों की कमी का असर इन छात्राओं की पढ़ाई पर भी साफ दिखाई दे रहा है। हालात ऐसे हैं कि कई अभिभावक अब अपने बच्चों का ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) निकलवाकर दूसरे स्कूलों में प्रवेश दिलाने की तैयारी कर रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल…

एक ओर सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और नए स्कूल खोलने की घोषणाएं कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर शिक्षकों की भारी कमी बच्चों के भविष्य पर सवाल खड़े कर रही है। आखिर 120 छात्रों की जिम्मेदारी एक शिक्षक के भरोसे कब तक चलेगी? क्या शिक्षा विभाग समय रहते व्यवस्था सुधार पाएगा, या फिर छात्रों का एक और शैक्षणिक सत्र अव्यवस्था की भेंट चढ़ जाएगा?

अब सबकी नजर जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर टिकी है।

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