लखनपुर | छत्तीसगढ़ हेडलाइन. सरगुजा जिले के लखनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में गर्भवती महिलाओं और बच्चों को वितरित की जाने वाली आयरन एवं विटामिन-ए सिरप के रखरखाव और वितरण व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल परिसर में बड़ी संख्या में दवाइयों की पेटियां खुले बरामदे में रखी मिलीं, जिनमें कुछ दवाएं एक्सपायरी होने का दावा किया गया, जबकि कुछ बोतलों पर एक्सपायरी तिथि स्पष्ट रूप से अंकित नहीं थी। मामले के सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
मौके पर पहुंची मीडिया टीम ने देखा कि आयरन और विटामिन-ए सिरप की पेटियां खुले स्थान पर रखी थीं। आरोप है कि मीडिया की मौजूदगी के दौरान फार्मासिस्ट ने वीडियो रिकॉर्डिंग का विरोध किया और बाद में दवाइयों को तत्काल बरामदे से हटाकर स्टोर रूम में रखवा दिया।
2022 की निर्माण तिथि वाली दवाओं पर उठे सवाल
स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि कई सिरप की बोतलों पर वर्ष 2022 की निर्माण तिथि अंकित है। ऐसे में यह आशंका जताई जा रही है कि क्या चार वर्ष पुरानी दवाओं का वितरण अब भी किया जा रहा था। वहीं कुछ बोतलों पर एक्सपायरी तिथि स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं होने से भी संदेह गहरा गया है।
अस्पताल परिसर में बच्चों को इन सिरप की बोतलों के साथ खेलते हुए भी देखा गया, जिससे सुरक्षा व्यवस्था और दवाओं के सुरक्षित भंडारण पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।
अस्पताल की व्यवस्था पहले भी रही सवालों के घेरे में
लखनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहले भी अव्यवस्थाओं को लेकर चर्चा में रहा है। कभी वार्डों में गायों के घूमने तो कभी अस्पताल परिसर में आवारा कुत्तों के झुंड दिखाई देने की घटनाएं सामने आती रही हैं। अब दवाओं के रखरखाव और वितरण में कथित अनियमितताओं ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सीएमएचओ आवास अस्पताल परिसर से सटा, फिर भी निगरानी पर सवाल
अस्पताल परिसर से सटे मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) के सरकारी आवास के बावजूद ऐसी स्थिति सामने आने से निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नियमित निरीक्षण होता, तो ऐसी स्थिति शायद सामने नहीं आती।
फार्मासिस्ट का पक्ष
दवा वितरण प्रभारी अमित सिसोदिया ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि संबंधित आयरन सिरप एक्सपायरी नहीं है और उसकी वैधता वर्ष 2027 तक है। उनके अनुसार दवाइयों को वितरण के उद्देश्य से बरामदे में रखा गया था।
हालांकि यह सवाल बना हुआ है कि यदि दवाएं वितरण के लिए रखी गई थीं तो लंबे समय तक खुले में क्यों पड़ी रहीं और कुछ बोतलों पर एक्सपायरी संबंधी जानकारी स्पष्ट क्यों नहीं थी। उल्लेखनीय है कि स्थानीय पत्रकारों को दवाओं की जांच के लिए स्वयं दवा वितरण प्रभारी द्वारा बुलाए जाने की भी बात सामने आई है।
बीएमओ ने क्या कहा
इस पूरे मामले पर ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) डॉ. ओ.पी. प्रसाद ने कहा कि अस्पताल में दवाओं के सुरक्षित भंडारण के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं है। इसी कारण सिरप की पेटियां बरामदे में रखी गई थीं। उन्होंने बताया कि जिन दवाओं की अवधि समाप्त हो चुकी थी, उन्हें उसी दिन अलग कर डिस्मेंटल (नष्ट करने की प्रक्रिया) के लिए भेज दिया गया है।
जांच की मांग तेज
घटना के बाद स्थानीय नागरिकों और क्षेत्रवासियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। अब यह जांच का विषय है कि दवाओं का भंडारण निर्धारित मानकों के अनुरूप किया गया था या नहीं, एक्सपायरी दवाओं की वास्तविक स्थिति क्या थी, और भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो इसके लिए स्वास्थ्य विभाग क्या कदम उठाता है।










