कवर्धा। छत्तीसगढ़ पुलिस आरक्षक भर्ती की दूसरी सूची जारी नहीं होने का मुद्दा अब सड़क पर उतर चुका है। शुक्रवार को प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में अभ्यर्थी कवर्धा जिला मुख्यालय पहुंचे और सरकार से सेकंड लिस्ट जल्द जारी करने की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया।
हाथों में बैनर-पोस्टर और मांगों से जुड़ी तख्तियां लेकर अभ्यर्थियों ने नारेबाजी की और कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ने की कोशिश की। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने कलेक्ट्रेट कार्यालय से पहले ही बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा।
1600 से 2000 पद खाली होने का दावा
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि वर्ष 2023-24 में निकली पुलिस आरक्षक भर्ती में सभी पदों पर नियुक्तियां पूरी नहीं हुई हैं। उनका दावा है कि करीब 1600 से 2000 पद अब भी रिक्त हैं, इसलिए इन पदों को दूसरी सूची के जरिए भरा जाना चाहिए।
अभ्यर्थियों का कहना है कि बस्तर समेत प्रदेश के कई क्षेत्रों के युवाओं ने भर्ती प्रक्रिया में हिस्सा लिया और अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन अभी तक उन्हें नियुक्ति का अवसर नहीं मिल पाया है। इसी वजह से लंबे समय से सेकंड लिस्ट की उम्मीद लगाए बैठे अभ्यर्थियों में नाराजगी लगातार बढ़ रही है।
बस्तर के अभ्यर्थी का विवादित बयान
प्रदर्शन के दौरान नारायणपुर से पहुंचे एक अभ्यर्थी ने बेहद गंभीर और विवादित बयान दिया। उसने कहा कि अगर दूसरी सूची जारी नहीं हुई तो बस्तर के कुछ युवाओं में हथियार उठाने और नक्सली बनने जैसी मानसिकता पैदा हो रही है।
अभ्यर्थी ने कहा कि रोजगार और भर्ती के अवसरों को लेकर बस्तर के युवाओं में पहले से असंतोष है और वे पुलिस भर्ती की दूसरी सूची को लेकर लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, हथियार उठाने और नक्सली बनने की बात को लेकर दिया गया यह बयान बेहद गंभीर है, जिस पर प्रशासन और पुलिस की नजर बनी हुई है।
बैरिकेडिंग के पीछे रोके गए प्रदर्शनकारी
अभ्यर्थियों के कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ने की कोशिश को पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। प्रदर्शन स्थल पर पुलिस बल की मौजूदगी बढ़ाई गई है। प्रशासन की ओर से पूरे घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है।
फिलहाल अभ्यर्थी अपनी मांग पर अड़े हुए हैं। उनका कहना है कि सरकार को भर्ती प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यदि पद रिक्त हैं तो दूसरी सूची जारी कर योग्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति का मौका देना चाहिए।
आरक्षक भर्ती की दूसरी सूची को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अब महज भर्ती की मांग तक सीमित नहीं दिख रहा है। बस्तर के युवाओं द्वारा दिए गए उग्र बयान ने पूरे मामले की संवेदनशीलता और बढ़ा दी है।










